एक अजीब परिस्थित का हल लेखनी प्रतियोगिता -05-Aug-2022
सुमित मन्दिर मे जाकर भगवान की मूर्ति के सामने खडे़ होकर हाथ जोड़कर बोला," हे ईश्वर मुझे कोई राह दिखाओ। मै आज एक अजीब मुश्किल में फस गया हूँ मै अब क्या करूं किसकी बात सुनू ? माँ की सुनता हूँ तो पत्नी का क्या करूँ वह मुझसे पूछती है कि मुझे अग्नि को साक्षी मानकर जो बचन दिये थे उनको आप कैसे भूल सकते हो ? हे ईश्वर मैं दोनौ को साथ लेकर चलना चाहता हूँ। "
वह आगे बोला," हे ईश्वर अब आप ही मुझे कोई राह दिखाओ। मै बहुत ही मजबूर होगया हूँ अब आप ही मुझे इस समस्या से बाहर निकाल सकते हो।"
सुमित अपने मा बाप की इकलौती सन्तान है उसके पापा की मौत कुछ दिन पूर्व ही होगयी थी। सुमित अपने पापा की मौत के बाद अपनी माँ को अपने साथ रखना चाहता था परन्तु उसकी पत्नी इसके लिए राजी नहीं थी।
इसका मुख्य कारण उसका पहनावा था वह बहुत ही कम व छोटे कपडे़ पहन कर रहती थी । सास के सामने उसको साडी़ पहननी पड़ती थी ।नन्दिनी को साडी़ बाधने में बहुत परेशानी होती थी।
उन दोनौ के बीच मेझ सुमित बुरी तरह फस गया था। वह उन दोनौ को ही रखना चाहता था । नन्दिनी का तर्क था कि माँ को बृद्धाश्रम में भेज दो वहाँ हर चीज मिलती है हम वहाँ उनका खर्चा देदिया करैगें।
सुमित का कहना था कि जिन लोगौ को मेरी माँ की पसन्द नापसन्द का पता नहीं है न कौनसी दवा कब लेनी है इसका भी कुछ नहीं पता मै उनके पास अपनी माँ को कैसे छोड़ सकता हूँ।
सुमित एक अजीब सी परिस्थित में फस गया था। कभी उसका दिल करता था कि वह नन्दिनी को तलाक देदे कभी सोचता था कि वह आत्म हत्या करले।
सुमित ने तलाक के कागज बनबा लिए और नन्दिनी के आगे रखकर बोला इनको पढ़लेना और अपने हस्ताक्षर करके मुझे बापिस कर देना।
तलाक के पेपर देखकर नन्दिनी को बहुत आश्चर्य हुआ वह सोचने लगी यह आदमी अपनी माँ के लिए अपने बीबी बच्चौ से तलाक लेने को तैयार है। यह कैसा आदमी है ? "
नन्दिनी ने सुमित के बहुत ही अजीज दोस्त रमन को फौन करके तुरन्त बुलाया। रमन भी फटाफट दौड़ता चला आया। और उसने पूछा," भाभी क्या हुआ जो इतना अर्जैन्ट बुलबाया है सब कुशल तो है ?"
नन्दिनी बोली," ठीक कहाँ है आपके भाईसाहब मुझसे तलाक माँग रहे है ।" इतना कहकर उसने तलाक के पेपर उनको दे दिए।
रमन तलाक के पेपर पढ़कर पूछा," सुमित कहाँ है?"
नन्दिनी ने अन्दर कमरे की तरफ इशारा कर दिया। अन्दर जाकर रमन ने देखा कि सुमित अन्धेरे में बैठा आँसू बहा रहा है।
रमन ने पूछा," सुमित यह सब क्या होरहा है। इस उम्र मे भाभी से तलाक?
"रमन मैने यह फैसला बहूत मजबूर होकर लिया है। जब तक मम्मी पापा दोनौ थे गाँव मे रहते थे । अब पापा नही रहे तब मै मम्मी को अपने पास लाना चाहता हूँ लेकिन आपकी भाभी इसके लिए तैयार नहीं है । वह कहती है इनको बृद्धाश्रम मे भेज दो। तू बता मै उनको बृद्धाश्रम कैसे भेजदूँ। वहाँ उनकी देखभाल कौन करेगा। इसी लिए मै तलाक लेकर माँ की सेवा करूँगा। इनका खर्चा महीने की पहली तारीख को इन्है मिलजाया करेगा।" सुमित रमन का हाथ थामकर बोला।
रमन की समझ में पूरा मामला आगया।उसने नन्दिनी को अलग लेजाकर पूछा," भाभी सुमित ठीक कह रहा है इस उम्र में बूढी़ माँ कहाँ रहेगी। तुम्है उनको रखने में क्या परेशानी है। यदि कल को आपके भाई आपकी माँ को घर से निकाल दें तब आप क्या करैगी। ?"
" मै उनसे अपना रिश्ता हमेशा के लिए समाप्त करदूँगी। वह माँ को एसे कैसे निकाल सकते है आपको क्या मालूम माँ हमें कैसे पाला था," नन्दिनी बोली।
"भाभी यही सुमित की माँ ने भी बहुत मुश्किल से उसे पाला है। वह उनको नही रखे यह कैसे सम्भव है ? "रमन ने नन्दिनी को समझाया।
नन्दिनी बोली," इनको समझादो वह रहे मुझे कोई ऐतराज नही है लेकिन व। मेरे पहनावे पर और बाहर जाने पर कुछ नहीं बोलैगी।
रमन ने सुमित को समझा दिया और तलाक के पेपर फाड़ दिये।
सुमित की समस्या का हल होगया और वह अपनी माँ को लेआया और उनको समझा दिया कि आप बहू से कुछ नही बोलैगी। सब समय का फेर है अब वही सास बहू एक साथ रहती है। एक थाली में साथ साथ खाना खाती है।
दैनिक प्रतियोगिता हेतु रचना
नरेश शर्मा " पचौरी"
05/08/
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Kusam Sharma
14-Aug-2022 07:08 AM
Nice
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Punam verma
06-Aug-2022 10:12 PM
Very nice
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Abhinav ji
06-Aug-2022 07:36 AM
Very nice👍
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